Cart

blog.muglo ka yogdan Nitish gupta

भारत की चित्रकला में मुगलों का योगदान

“जिस प्रकार ऊपरवाले ने एक इंसान को जन्म दे कर बहुत ही अनोखा काम किया है,
ठीक वैसे ही एक चित्रकार अपनी हर चित्रकारी के साथ एक अनोखी भावना को जन्म देता है।”

blog.muglo ka yogdan Nitish gupta

 

भारतीय चित्रकला के विकास में मुगलों का विशिष्ट योगदान रहा है।

उन्होंने राज दरबार, शिकार एवं नए दृश्य से संबंधित नए चित्रों का आरंभ किया नए रंगो एवं आकारों  की शुरुआत की।

भारत के रंगों जैसे फिरोजी रंग एव भारतीय लाल रंगो का इस्तेमाल होने लगा।

मुगल शासकों के द्वारा करवाई गई चित्रकारी में ईरानी और फारसी प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।

 

 

 

 

 

 


भारत में मुगल शैली की चित्रकला का जन्म हुमायूँ के शासनकाल में प्रारंभ हुआ।blog.muglo ka yogdan Nitish gupta

शेरशाह से पराजित होने के पश्चात् हुमायूँ ने फारस एवं अफगानिस्तान के अपने निर्वसन के दौरान मुगल चित्रकला की नींव रखी।
फारस में हुमायूँ की मुलाकात दो चित्रकारों-

1.मीर सैय्यद अली ( जिसे पूर्व का रैफेल कहा जाता है ) एवं
2. ख्वाजा अब्दुस्मद

से हुई। इन्होंने ही मुगल चित्रकला की नींव रखी। आगे चलकर अकबर के शासनकाल में चित्रकला की मुगल शैली अपने सर्वोत्कृष्ट स्थान पर पहुँच गई। इस काल में चित्रकारी सामूहिक रूप से की जाती थी जिसमें एक से अधिक कलाकार मिलकर किसी चित्र का निर्माण करते थे। फलस्वरूप चित्रकला की मुगल शैली स्वदेशी भारतीय चित्रकला शैली और फारसी चित्रकला की सफावी शैली के संश्लेषण के रूप में विकसित हुई।

 

 

अकबर के शासनकाल के दौरानblog.muglo ka yogdan Nitish gupta
अकबर के शासनकाल के दौरान चित्रकला के मुख्य रूप से दो विषय थेः
1. दरबार की प्रतिदिन की घटनाओं का चित्रण
2. छवि चित्रण।

अकबर के बेटे, जहाँगीर (1569-1627) के शासनकाल, और उनके पोते शाहजहाँ (15 9 2-1666) ने भी मुगल चित्रकला को एक नई ऊँचाई दी। अबुल हसन जहाँगीर के सबसे पसंदीदा चित्रकारों में से एक थे। शायद इसीलिए सम्राट ने अपनी आत्मकथा “जहाँगीरनामा” में लिखा है

“मैंने अभी तक जितना हो सके अबुल हसन को संरक्षण दिया है ताकि उसकी कला आसमान की ऊँचाई को छू सके। ”

इसी समय मुगल चित्रकला पर भारतीय प्रभाव भी गहरा हो गया।

अकबर ने चित्रकला की प्रशंसा करते हुए कहा है कि

“चित्रकार के पास ईश्वर को पहचानने का एक विचित्र साधन होता है।”

 

 

 

blog.muglo ka yogdan Nitish guptaजहाँगीर के शासनकाल के दौरान
जहाँगीर स्वयं एक महान चित्रकार एवं कला का पारखी था। जहाँगीर के समय चित्रकला की मुगल शैली, पारसी प्रभाव से मुक्त हो गई।

इस समय कलाकारों ने नीले और लाल जैसे जीवंत रंगों का उपयोग करना आरंभ किया
और चित्रें को त्रियामी प्रभाव देने में सक्षम हो गए। जहाँगीर प्रकृति प्रेमी था।

अतः उसे पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों के चित्रण में विशेष आनंद आता था।
उदाहरण के लिये ‘चिनार’ के पेड़ पर असंख्य गिलहरी बैठी है, का चित्रण इसी समय अबुल हसन के द्वारा किया गया। जहाँगीर के समय में छवि चित्रण की तुलना में पांडुलिपि के चित्रण का महत्त्व कम हो गया।

‘तुजुक-ए-जहाँगीरी’ ही एकमात्र पांडुलिपि चित्र का उदाहरण है।
जहाँगीर के समय मुगल चित्रकला में यूरोपीय चित्रकला शैली का प्रभाव और गहरा हो गया जो कि अकबर के काल से शुरू हुई थी।

 

 

 

blog.muglo ka yogdan Nitish gupta

शाहजहाँ के शासनकाल में

मुगल चित्रकला ने अपनी गुणवत्ता को बनाए रखा। इसके शासनकाल में रेखांकन और बॉर्डर बनाने की तकनीक में उन्नति हुई। शाहजहाँ को दैवीय प्रतीकों वाली अपनी तस्वीर बनाने का शौक था एवं इसके शासनकाल के दौरान कई सचित्र पांडुलिपियाँ भी तैयार की गई।

औरंगजेब के अधीन चित्रकला को शाही संरक्षण मिलना बंद हो गया क्योंकि इसने चित्रकला को इस्लाम के विरुद्ध माना।
इससे चित्रकला की क्षेत्रीय शैलियों का विकास हुआ, जैसे- राजस्थानी चित्रकला शैली, पहाड़ी चित्रकला शैली।

अर्थात् यह कहा जा सकता है कि औरंगजेब के बाद मुगल चित्रकला अन्य क्षेत्रों में भी फैल गई तथा कई अन्य विशेषताओं के साथ नए रूप में पैदा हुई।

 

 

 

 

blog.muglo ka yogdan Nitish guptaऔरंगजेब के शासनकाल में

औरंगजेब ने चित्रकला को इस्लाम के विरुद्ध मानकर बंद करवा दिया था।

किंतु उसने शासन काल के अंतिम वर्षों में उसने चित्रकारी में कुछ रूचि ली जिसके परिणामस्वरूप उसके कुछ लघु चित्र शिकार खेलते हुए दरबार लगाते हुए तथा युद्ध करते हुए प्राप्त होते हैं

औरंगजेब के बाद मुगल चित्रकार अन्यत्र जाकर बस गए जहां पर अनेक क्षेत्रीय चित्रकला शैलियों का विकास हुआ।

मनुची ने लिखा है कि
“औरंगजेब की आज्ञा से अकबर के मकबरे वाले चित्रों को चुने से पोत दिया गया था।”
जहांगीर ने अपनी आत्मकथा “तुजुक- ए- जहांगीरी” मैं लिखा है

 

 

 

 

blog.muglo ka yogdan Nitish guptaअकबर के शासनकाल में 

“कोई भी चित्र चाहे वह किसी मृतक व्यक्ति द्वारा बनाया गया हूं या फिर जीवित व्यक्ति द्वारा मैं देखते ही तुरंत बता सकता हूं कि
यह किस चित्रकार की कृति है यदि कोई सामूहिक चित्र है तो मैं उसके चेहरे पृथक पृथक करके यह बता सकता हूं कि प्रत्येक अंग किस चित्रकार ने बनाया है।”

“”चित्रकार के पास ईश्वर को पहचानने का एक विचित्र साधन होता है””—अकबर

“चित्रकला अब पुस्तकों को सजाने तक ही सीमित नहीं रहा ।
व्यक्तिचित्र तथा जीवन एवं प्रकृति के विषय पर बनाई गई चित्र अधिक लोकप्रिय रही।
नादिर, मनोहर , मंसूर, गोवर्धन एवं फारुख बैग इस दौर के उच्च कोटि के चित्रकार थे।“

 

 

 

=======================================================================================

=======================================================================================

blog.muglo ka yogdan Nitish guptaAuthor : Nitesh Gupta
Current Address :-. Kolkata, West Bengal

……..

About author :-

I started drawing in 2nd standard I used to decorate my school notebook by drawing something from each chapter at the end of question answer sections.
In summer holidays, I used to draw all the character of Ramayana and Mahabharata in my drawing notebook.
Unfortunately, I don’t have those notebook.

At class 6th standard, I started painting and portrait sketches. I remember those days when I participated first time drawing Competition at district school level and got 1st Rank and top in the school. All the teachers, friends and family members was so happy. All they motivated me so much. Afterthat I participated in every competition one by one and secured rank.

Sadly from 10th standard I was stucked in my studies. Once again I started painting and I could not believe I was way more better than before this time. And till now I am painting at least one painting each weeks.

I would like to say thanks to pagalbaba who given us this opportunity to showcase our talent in such pandemic situation. That’s why I drawed “corona Warriors” sketched and give respect to all the corona Warriors through this sketches.

 

Please follow and like us:

One thought on “भारत की चित्रकला में मुगलों का योगदान

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...
Translate »