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Artist Kavita Ki Kala Yatra चित्रकार कविता की कलायात्रा

कविता…..का अर्थ है- काव्यात्मक सुरीली रचना,कवि की वह कृति जो छंदों की श्रृंखलाओं में विधिवत पिरोई गई हो।

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हां …..ऐसे ही साधारण व्यक्तित्व वाली बहुमुखी प्रतिभा की धनी बनारस की हमारी प्यारी कलाकार – कविता । कहते हैं तस्वीर का रंग चाहे जो भी हो मुस्कान का रंग हमेशा खूबसूरत होता है। ऐसे ही सदा मुस्कुराते रहने वाली कविता जिनसे मैं कुछ समय पहले मिली तोे आपके व्यवहार से बहुत खुश हुई।

कविता ने बीएएफए और एम.एफ. ए फैकल्टी ऑफ विजुअल आर्ट्स, बीएचयू से चित्रकला में बीएफए और अंतिम वर्ष के एमएफए का अध्ययन किया। उन्होंने वाराणसी, लखनऊ, दिल्ली, चंडीगढ़, हैदराबाद और भारत के अन्य हिस्सों में आयोजित कई समूह प्रदर्शनियों में भाग लिया है। “क” आर्ट गैलरी में लगे एग्जीबिशन ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया था । इनका कई पुरस्कारों के लिए चयन हुआ है और उनमें से कई जीते हैं। उसने सक्रिय रूप से कार्यशालाओं में भाग लिया है।
आज, वह विज़ुअल मेनिफेस्टेशन की अपनी शैली खोजने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने जीवन की सार्वभौमिक यात्रा पर आधारित चित्रों की श्रृंखला विकसित की है जिसे हिंदी में ‘यात्रा’ कहा जाता है।

 

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कविता के पिताजी एक अप्लाइड आर्टिस्ट व फोटोग्राफर है जिन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से कला का अध्ययन किया। पिता की छत्रछाया में इनका बचपन रंगो के सानिध्य में ही बीता। अनुकूल वातावरण में जिस तरह पौधा पनप कर वृक्ष बन जाता है वैसे ही कविता की भी कला में दिलचस्पी बढ़ने लगी। फूल ,पत्ते ,आलेखन ,दृश्य चित्रण आदि में उन्होंने अपना हाथ आजमाया।

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कला यात्रा एक खोज है,

जिसे कविता ने शुरू किया है यह अंतहीन यात्रा पद चिन्हों की छाप बनाते हुए शुरू की गई एक कोशिश है ,जिसमें  उनके पिता का योगदान अमूल्य है।

अपनी कला में जीवन से संबंधित सामाजिक पहलू और भावनाओं को उतारना ही ने खूब आता है। बनारस मंदिरों की प्राचीन नगरी है ,किंतु दुर्भाग्यवश यहां मंदिरों ,घाटों के पास बैठे भिखारियों को देखकर मन बेचैन होता है। प्रचंड धूप, बिना कपड़ों के दया की याचना लिए इनके नेत्रों की आस जिसे कविता ने चित्रों में उकेरा है।
इनका मानना है विशेषता प्राप्त करने के लिए किसी एक विशेष शैली पर पूरा ध्यान देना चाहिए। पेंटिंग में कई तरह की बनावट होती है परंतु, बनावट ऐसी होनी चाहिए_ जो रेखाओं से पढ़ी जाए और स्पर्श के बिना उसकी अंतरंगता दिल को महसूस हो।

कविता कहती है ..धुन के पक्के लोग कुछ कर गुजरते हैं ।किसी भी व्यक्ति के लिए कला तभी उसका जीवन बन सकती है जब कला के बिना उसका जीना असंभव हो जाए उसका यह भी मानना है कि कलाकार का सबसे अच्छा आलोचक वह स्वयं यानी उसकी अंतरात्मा है वही उसे सही दिशा दे सकती है और उसकी त्रुटियों की ओर संकेत करते हुए उसे आगे बढ़ने की प्रेरणा दे सकती है। कला की पूर्णता ही कलाकार की सफलता की शर्त है और यह पूर्णता निरंतर साधना से ही संभव होती है।

 

 

 

 

 

 

 

 

कला यात्रा का उद्देश्य अपनी कला को प्रचार-प्रसार करना ही है। कुछ कलाकृतियों में इन्होंने अपने पैरों की छाप के माध्यम से अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का विलक्षण तरीका इजाद किया है। पद चिन्ह जो व्यक्ति के जीवन और मृत्यु की यात्रा का प्रतिनिधित्व करता है। इन्होंने अपने पदचिन्हों के छाप बनाते हुए कुछ सामाजिक पहलुओं को बड़ी ही कलात्मकता से रंगों के माध्यम से कागज पर बिखेरा है। कविता की कृतियों में विभिन्न माध्यमों को एक साथ प्रयोगात्मक तरीके से जोड़कर अमूर्त कला के कई उदाहरण देखने को मिलते हैं। हर कलाकार की अपनी एक अलग दुनिया होती है जहां वह जीता है। उसी तरह उसकी कृतियां भी उस कलाकार का दर्पण होती है। ऐसा ही दर्पण है कविता की पद चिन्हों से बनी हुई कलाकारी जो इनके मौलिकता की अभिव्यक्ति है।

आपने वाटर कलर, एक्रेलिक कलर ,ऑयल कलर, लेटर प्रेसिंग इंक के माध्यम से काम किया है यह चित्र के पारदर्शी और अपारदर्शी गुणों को निखारने में मदद करते हैं। चित्र के विषय के अनुसार इसमें रंगों का चयन किया जाता है ।जैसे मौसम अपना मिजाज़ बदलता है वैसे कविता की चित्रकारी में रंगों का चयन होता है।

कला जगत के इस विशाल संसार में अपने पद चिन्हों की छाप छोड़ते हुए नई पहचान बनाने वाली हमारी कविता निरंतर बुलंदियों तक पहुंचने के लिए तैयार है। और पागलबाबा .कॉम  उनको  उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनायें  प्रदान करते है।

Sarika Sharma ,Meerut UP
सारिका शर्मा

लेखिका : सारिका शर्मा

 महाराष्ट्र के पुणे जिले में  जन्म । प्रकृति से प्रेम होने के कारण प्रकृति लेखन में  विशेष रुचि ।

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